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  २. AI और माँ — दो पीढ़ियों की कहानी (Series : ज़िन्दगी और AI) तुमने कहा — माँ को AI समझ नहीं आएगा। मैंने पूछा — या तुमने माँ को समझाने की कोशिश ही नहीं की? एक दृश्य देखो — माँ रसोई में बैठी हैं। हाथ में आटे की लोई है। आँखों में वही पुरानी थकान है — जो सालों की मेहनत ने दी है। तुम laptop लेकर आते हो और कहते हो — "माँ देखो, ये AI है।" माँ मुस्कुराती हैं — एक वो मुस्कान जो कहती है — "बेटा, ये सब तेरे लिए है, मेरे लिए नहीं।" लेकिन क्या सच में ऐसा है? माँ ने ज़िन्दगी भर एक काम किया — सबकी ज़रूरत पहचानना। बिना पूछे। बिना बताए। सुबह उठने से पहले ही जानती थीं कि आज किसे क्या चाहिए। ये कौनसी तकनीक थी? ये कौनसा algorithm था? ये माँ का algorithm था — प्यार का algorithm। और AI? — AI भी यही करता है। लोगों की ज़रूरत पहचानता है। बिना पूछे समझने की कोशिश करता है। हर बार बेहतर होता जाता है। फ़र्क सिर्फ़ इतना है — माँ का algorithm दिल से चलता है। AI का algorithm data से चलता है। और दिल — data से हमेशा बड़ा होता है। लेकिन एक सच और है — आज वो माँ जो अपने बेटे से दूर है — विदेश में, द...

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